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हमारा करते

                
                                                         
                            ख्याल कभी तुम , जो हमारा करते।
                                                                 
                            
क्यूं तन्हा रहना,हम यूं गंवारा करते।।

मेरी वफा को भी, वफा गर मिलती।
फिर मुहब्बत मे क्यूं, खसारा करते।।

आदतन, अहल-ए-कफस नही हुए।
ना करते यूं , तो कैसे गुजारा करते।।

खुद चलकर,दर-ए-यार पहुँच जाते।
काश एक बार,वो हमे इशारा करते।।

घटा बनकर छा जाती,जुल्फें उनकी।
दिल से उस मंजर का,नजारा करते।।

तसव्वुर मे लाना उन्हें,गुनाह है क्या।
फिर तो हम ये गुनाह,दोबारा करते।।

-यूनुस खान
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2 वर्ष पहले

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