कहीं मातम कहीं खुशी छायी तो है।
हर सिम्त, एक बज़्म सजायी तो है।।
राह-ए-उल्फत में मिली मंजिल मुझे।
मैं तन्हा नहीं,मेरे साथ रुस्वाई तो है।।
-यूनुस खान
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