तपते हुए लबों की प्यास,मिटाने चला जाये।
घर से दूर, कंही किसी मयखाने चला जाये।।
बड़े पुरखतर हो चले हैं , अब सन्नाटे घर के।
कहीं तन्हाई में, यूं वक्त बिताने चला जाये।।
अक्सर,हार से दिल को तस्कीन मिलती है।
इसीलिए तो, किसी को जिताने चला जाये।।
ये आइने भी , अब बेवफाई पर उतर आये।
दीवार पे लगे आईनों को,हटाने चला जाये।।
-यूनुस खान
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