अगरचे,जख़्म जो तूने दिये,भर गये सारे।
मगर,निशान रग-ए-जां में उतर गये सारे।।
सब जश्न भी , मातमों में तब्दील हो गये।
वो सिलसिले, गर्दिशों के गुज़र गये सारे।।
-यूनुस खान
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