ख़ामोश वीरानों से , तन्हाई अच्छी थी।
इस गुमनामी से तो,रुस्वाई अच्छी थी।।
कुरबत है पर एक फांसला है फिर भी।
यकीं कर, इससे तो जुदाई अच्छी थी।।
-यूनुस खान
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