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डायरी के पन्ने

                
                                                         
                            नए-पुराने विचार आते हैं मन में,
                                                                 
                            
पर लिख एक न पाता हूँ।
जब मन बहुत बेचैन होता है,
तब दुनिया से मिल आता हूँ।

लोगों के दुख-दर्द,
दुनिया के तमाशे,
थोड़ा-थोड़ा
अपने साथ ले आता हूँ।

नर्म दिल का हूँ,
बस इतने में भर आता हूँ।

नए किस्सों से
नए विचार मिल जाते हैं।
जिन्हें मैं
तारीख़ के साथ लिखता हूँ।

मेरी डायरी खोलोगे,
तुम्हें हर वह तारीख़ मिलेगी।

"तेरे उदास होने पर
मैं उदास हो जाता हूँ,
तेरे रोने पर
मैं भी जी भर रोता हूँ।"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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