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सत्य निकेतन

                
                                                         
                            खिंच गयीं खूबसूरत खुरचन की तस्वीरें
                                                                 
                            
बन गयी बहादुरी की वीडियो
लूट लिया खजाना खंजर से

कर दी राखी कि विदाई
चुप्पी की चारदीवारी में इन

रही न साँस सिसकती माँओं की बाहों में
कर लीं पिता ने कसकर मुट्ठी बंद
न आयेगा वो अब पल
जब मन को मिलता था सुकून पल

बिछड़ गया वो अपना
जो लेकर घर से निकला था सपना

रह गए अधूरे से ख्वाब
जिन्हें संजोया था अपने साथ

चले गए वो ठुनकते - मुस्कराते पल
जिन से मिलती थी हरदम उमंग

हो गया अचानक से सबकुछ खत्म
ले गयी एक पल की रवानगी
जिंदगी के खूबसूरत पलों को अपने साथ

अब रह गए अकेले पश्चाताप के साये में
शायद न कहा होता उस दिन
तो न होता आज ये दिन

समा गया सत्य निकेतन की सरजमीन में
मुख्यमंत्री की मामूली सी मचलाहट
Mcd की मरी हुई सी मशक़्क़त
सांसद का बिन सरोकार का वाचन
विधायक का बनावटी भाषण
साथ ही अपनों की पुकार।
-यश कुशवाह
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एक महीने पहले

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