एक महफिल सजाते हैं,
बिछड़े यारों को बुलाते हैं,
प्यार से रहना सिखाते हैं,
इस इतवार बस एक काम होगा,
सबको चाय पिलाते हैं!!
हम और वहम को मिटाते हैं,
गुजरें गम को भुलाते हैं,
खुद को बेवजह क्यूँ रुलाते हैं,
इस इतवार बस एक काम होगा,
सबको चाय पिलाते हैं!!
~माही
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