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मैं स्वयं को श्रेष्ठ बताता हूँ...

                
                                                         
                            मैं छोड़ उम्मीदें अपनों से,
                                                                 
                            
मैं मुक्त हो करके सपनों से,
निज जीवन का भार उठाता हूं,
मैं स्वयं को श्रेष्ठ बताता हूँ!!

खुद के जैसा न होना ही,
असली दुख का कारण हैं,
अपने मन की न करना,
इसका एक ठोस उदाहरण हैं,

मैं अपने मन के नये गीत को,
गाता हूँ दोहराता हूँ,
मैं स्वयं को श्रेष्ठ बताता हूं!!
- माही
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2 महीने पहले

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