जीवन था शहद सा,नीम की आदत ना थी।
जीवन था शहद सा,नीम की आदत ना थी..
जो नीम को चखा तो,मालूम हुआ;
शहद केवल शहद नहीं...
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X