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“मैं तुम बन गया”

                
                                                         
                            मैं कभी कह न सका तुमसे
                                                                 
                            
कि कितनी मोहब्बत है मुझे तुमसे,
तो मैंने तुम्हारे लिए
खाना बनाना सीख लिया।

मैं कभी छूकर जता न सका
कि कितनी फ़िक्र रहती है
मुझे तुम्हारी,
तो मैंने तुम्हारे थके हुए पाँव
दबाना सीख लिया।

मैं कभी बता न सका
कि तुम्हारी हँसी मुझे
कितनी ख़ूबसूरत लगती है,
तो मैंने तुम्हारी छोटी-बड़ी हर ख़्वाहिश
पूरी करना सीख लिया।

और फिर एक दिन यूँ हुआ,
कि तुम्हें समझने, तुम्हें चाहने
और तुम्हें महसूस करने की चाह में,
मैं धीरे-धीरे तुम बन गया।
- वासिफ़
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3 महीने पहले

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