ग़मों में ख़ुशी तलाश कर _ खुशियों में ग़म नहीं दिखता है
महल में रहने की इच्छा ये सोच नाकारा वो बदहाली का है
कौन रहता उसे क्यों मिला हमें क्यूं नहीं दिल से निकाल दो
जो तेरे पास है उसके पास नहीं है क्या इसे सोचा है या नहीं
मेहनत से रोटी मिलती है तलाश वो ख़ोज से अनमोल मिलता है
अनमोल पाने के लिए भूख प्यास की सिद्दत सहना पड़ता है
सूरज की तपिश इंसान को महसूस होता है मग़र सूरज को नहीं
पूछो चांद से तू ठंडा क्यूं है जवाब न मिलेगा ये उसकी सिफत है
खुदकशी करने वाले यहां वहां सब कुछ खो दिया मिलना अज़ाब है
अज़ाब से बचना आचरण वो चरित्र बचाना होगा यही ज़िन्दगी है !
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