दिल जलता है आंखें नहीं देखती है हरगिज़
हर कोई यह समझता है वह मेरे जैसा होगा
देखने में दिल सभी का एक जैसा होता है मग़र
दिल में ख्यालें किरदार की मुवाफ़िक उभरती है
बद माँ बाप की औलादें शायद कोई अच्छा होता है
आसमां ज़मी पर जमीं आसमां में नहीं हो सकता है
इस दौर में नई नस्ल अक़्सर यही सोचता है सदा
वह ऐसा है हम क्यूं नहीं बन सकते महज़ सोचने में
हसद _लालच_ दूसरे से जलना अच्छी सिफत नहीं है
धन और घर किसी तरह से प्राप्ती अच्छा नहीं होता है
जिसे होती है किसी चीज़ का पाना एक मिशन में होता है
इलहामी ख्याल हरेक आदमी में दिल में नहीं उभरती है
रदीफ काफिया इल्मी उपज ख़ुदको अज़ीम बनने के लिए
हर कोई न ज़मीन के अन्दर न ही आसमां में देखता है
इल्म जानना अमल करने केलिए होता ठगने के लिए नहीं
अरबी _हिंदी उर्दू अंग्रेजी वगैरह बोलना इल्म की दलील नहीं
कुर्सी पर बैठना आसान है कभी बहुत मुश्किल होता है
कुर्सी पर हर कोई बैठ जाता है नवाबी शान दिखाने के वास्ते
एडिसन अगर कुर्सी बैठे रहते तो दुनियां में रौशनी नहीं होता
-वसी अहमद अंसारी
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