दो हज़ार ईसवी में जन्मे बच्चे निहायत बदतमीज़ और काहिल देखने को मिलता है
डिग्री का कद्रदान_अदब तौर तरीक़े मुस्लिम घराने से ही खत्म हो चुका है जनाब
मुस्लिम छोकरी को आगे पीछे की शर्म गाहों में शर्म नहीं आंखों में भी हया नहीं है
शर्म लगती है बहुत मग़र बालों में लगती है जिसे बांध कर रखती है आँखे खुला रखती है
चाल ढाल खलनायक की तरह बीच सड़को पर अकड़ कर चलती बुजुर्गों का एहतराम नहीं
मुस्लिम छोकरे दफ़्तर में सभी का चमचा गिरी करते मस्ज़िद में घूम घूम कर मोबाइल से बातें करता है
अपना ओपिनियन दे देता हूं जिल्लत की रोटी खा सकता है इज़्ज़त का मक़ाम पाना मुमकिन नहीं
नमाज़ पढ़ना जन्म देने वाले का नाम लेना समझा जायेगा फ़क़त इसके सिवा और कुछ नहीं
सच्चा_ईमानदार झूठ वो चुगली करने और सुनने महफ़ूज़ शख़्स झूठा नमाज़ी से अफ़ज़ल है
ख़ुदा ने इंसान को दुनियां में सिर्फ़ नमाज़ पढ़ने के लिए नहीं भेजा है फ़रिश्ते ही बेशुमार थे
इस दौर का मौलाना मुफ़्ती में अदब आदाब और ईमानदारी नहीं ऐसे में कोई अमल क्या करे
तबलीगी जमात हदीश को छोड़ कर- इलयास साहब की किताब को हदीश समझ रखा है
घर घर जाकर किसी को मस्ज़िद में लाना सवाब नहीं जो दिल से ख़ुदा तक पहुँचा ये अमाल है
लोगों को दिखा कर तसबीह पढ़ने वाले यक़ीनन काहिल और फ्रॉड होता है ये मेरा आज़मुदा है।
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