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1856 में देवबंद में 1904 में बरैली और 1905 अहले हदीस क़ायम हुआ था

                
                                                         
                            एक ही फिरका है जिसे जहन्नुम से निजात मिलेगी वह सच्चाई अदल वो इंसाफ़
                                                                 
                            
जो झूठ, गिबत से महफूज रहते हुए हक और इंसाफ़ बोलने का आदि रहा है
बरेली , देवबंदी, अहले हदीस दिगर की बातें करने वाले मक्कार होता है
1856 में देवबंद में 1904 में बरैली और 1905 अहले हदीस क़ायम हुआ था
1971 से तबलीगी जमात का इजलास कायम हुई किशनगंज से यहूदी एजेंट के मार्फ़त
तब से देवबंदी, बरेली, अहले हदीस और दीगर की बातें चर्चे में आज उरूज पर है
इन सब वजूहात के सबब इन सभी पर बुत परस्त की हुकूमत है जो पहले नही था
झूठ बोलने आंखों की जना करने वाले का कोई मजहब नहीं होता
नबी मुहम्मद कभी तबलिग नही किए उनकी अच्छी कारनामा देखकर लोग उनके साथ होते गए
नबी मुहम्मद कोई जंग नहीं किए यहुदियों ने जंग लड़ने का प्रचार किया है
होश में आ जाओ नमाज़ी वरना तुम्हारे दिन बहुत बुरे आने वाली है
झूठ बोलने वाला नमाज़ी से सच बोलने वाला गैर नमाज़ी बहुत अच्छा होता है
खुदा की इबादत करने केलिए फरिश्ते ही काफ़ी थे जनाब साहब
इन्सान को क्यूं जन्म दिया गया है बस यही सोचना वो समझना होगा।

 
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2 महीने पहले

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