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सरकार वह नहीं जिनके वोट से कुर्सी मिली उन्हें अपनी इशारे पर नचाता रहे

                
                                                         
                            मालदार वह नहीं जो महल में रहता है ग़रीब वो नहीं जिसका दामन पाक है
                                                                 
                            
मालदार उसे समझें जो सड़क पर सोते और मेहनत करके अपना पेट भरता है
सरकार वह नहीं जिनके वोट से कुर्सी मिली उन्हें अपनी इशारे पर नचाता रहे
कुर्सी का ग़लत प्रयोग करने वाले इंसानी ढांचा में शैतान का रूप समझा जायेगा
जो अपनी इज़्ज़त बेच कर पैसा प्राप्त करे वह बद चलन है न कि मालदार समझें
बा किरदार लोग कैसी का दिल दुखा कर न ज़मीर बेच रहे दुनियां में अपना घर बनाना चाहता है
-वसी अहमद क़ादरी
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3 महीने पहले

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