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उसकी बातें इक कविता हैं

                
                                                         
                            बादलों ने सकूं बरसाया,
                                                                 
                            
उसका चेहरा जब नजर आया,
बारिशों ने भी धरती पे आ के
उस पे अपना नेह लुटाया,
उसकी बातें
इक कविता हैं
जैसे शब्दों ने स्वयं पन्नों पे
साकार होना स्वीकार किया।
उसका व्यक्तित्व की जो रौनक है
जो चेहरे से नहीं,
आत्मा के ओज से है निखराया।
वह चलता है तो
रास्ते भी आगमन में सज जाते,
उसका रुख कर हवाऔं ने ,
मनभावन इक साज बजाया।
उसकी खामोशी में भी
एक गूंज है—
जैसे पर्वत ने बिना बोले भी
अपनी ऊँचाई को बताया।
उसकी आँखों में
एक ठहराव है—
जैसे कोई समंदर अपने भीतर
अनगिनत कहानियाँ छुपाया।
उसकी मुस्कान
चितचोर बड़ी
दिल में उतरकर यूं
हक से घर अपना बसाया।
वह केवल सजीला ही नहीं,
विश्वास है मन का,
जिसे देख मन कह उठता है,
उस से प्रेम
सिर्फ किया ही नहीं
प्रेमरंग हमने रूह को रंगाया।
- नीरू जैन
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5 महीने पहले

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