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तिलस्म सी सोहबत तुम्हारी

                
                                                         
                            होठों पे इत्र सी मुस्कुराहटें
                                                                 
                            
और जिंदगी शरबत सी लगती,
तिलस्म सी सोहबत तुम्हारी
नामौजूदगी में भी
तुम्हारी छवि दिखती,
प्रीत की पगडंडियां पथरीली
पर हर राह मखमली सी लगती,
तुम क्या मिले कि ज़िंदगी
हर रोज नई सी लगती।
काफ़िर से मन में उग आई
ढ़ेर सी इबादतें
हर इबादत में सिर्फ़
तुम्हारी सलामती की दुआ सी रहती।
- नीरू जैन
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5 महीने पहले

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