आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

होली रंग गुलाल

                
                                                         
                            फागुन की मधु बयार, गालों पे गुलाल सजे।
                                                                 
                            
रंगों की बरसात, हर आँगन खुशहाल रहे।
भूलें सब मतभेद, गले मिल गुलाल लगाए।
प्रेम सुधा के रंग संग, मन के सभी द्वेष मिटाए।
झूमे गाएँ गीत, प्रेम की रीत निराली
रंगों में लिख जाए, अपने जीवन की कहानी।
रंगों की सौगात, दुआओं की पिचकारी,
भीगे हर इक तन मन, सजी मुस्कान प्यारी,
मन बंद द्वार, आज स्वयं खुल जाएँ।
बरसे स्नेह अपार, रिश्ते फिर से जुड़ जाएँ।
रिश्तों पर अबीर, स्नेह सुधा बरसाए।
मिटे मनोमालिन्य, जग प्रेम रंग में रंग जाए।
- नीरू जैन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर