फागुन की मधु बयार, गालों पे गुलाल सजे।
रंगों की बरसात, हर आँगन खुशहाल रहे।
भूलें सब मतभेद, गले मिल गुलाल लगाए।
प्रेम सुधा के रंग संग, मन के सभी द्वेष मिटाए।
झूमे गाएँ गीत, प्रेम की रीत निराली
रंगों में लिख जाए, अपने जीवन की कहानी।
रंगों की सौगात, दुआओं की पिचकारी,
भीगे हर इक तन मन, सजी मुस्कान प्यारी,
मन बंद द्वार, आज स्वयं खुल जाएँ।
बरसे स्नेह अपार, रिश्ते फिर से जुड़ जाएँ।
रिश्तों पर अबीर, स्नेह सुधा बरसाए।
मिटे मनोमालिन्य, जग प्रेम रंग में रंग जाए।
- नीरू जैन
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