आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अपनो का साथ

                
                                                         
                            जो शून्य लगे, वही पूर्णता बन जाए,
                                                                 
                            
जब अपनों का साया साथ निभा जाए।

तरक्की तभी सुहाती है, जब रिश्ते भी महकते हों,
वरना ऊँचाइयों पे पहुँचकर भी मन तन्हा रह जाए।

मजबूरियाँ नहीं, सहारे चाहिए सफ़र में,
जो थाम लें हाथ—तो रास्ते आसान बन जाए।

अपनों संग बँटी खुशी ही सच्ची दौलत है,
वरना शोहरत भी पलभर में धुंधली हो जाए।

बढ़ते रहिए, मगर साथ अपनों को भी चलाइए,
यही जीवन का सच्चा सौंदर्य कहलाए।
-नीरू जैन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर