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हे ईश्वर! बस इतनी-भर ज़िंदगी दे

                
                                                         
                            हे ईश्वर! बस इतनी-भर ज़िंदगी दे,
                                                                 
                            
सुकून से दो जून की रोटी
और तन ढकने को वस्त्र दे।
भूखा न रहे कोई तेरे द्वार पर,
बस इतनी-सी कृपा कर दे।
हे ईश्वर! बस इतनी-भर ज़िंदगी दे।
बंद कर दे दिलों की नफ़रत,
मोहब्बतों की नदियाँ भर दे।
अमन-चैन से परिपूर्ण हो यह जहाँ,
बस इतनी-सी दया कर दे।
हे ईश्वर! बस इतनी-भर ज़िंदगी दे।
खुले आसमान के नीचे
निर्भय होकर विचरण कर सके हर कोई।
ऊँच-नीच, अमीर-गरीब के भेद मिटा दे,
सबमें समानता का भाव भर दे।
बचपन सदा मुस्कुराता रहे,
यौवन जीवन से परिपूर्ण रहे,
और बुढ़ापे को सम्मान व सहारा मिले।
बस इतनी-सी कृपा कर दे।
हे ईश्वर! बस इतनी-भर ज़िंदगी दे।
रोक दे नफ़रत की आँधियों को,
मिटा दे दिलों में खड़ी दीवारें।
अपनत्व और प्रेम का दीप जले,
हर हृदय में अमृत-सा भाव भर दे।
हे ईश्वर! बस इतनी-भर ज़िंदगी दे।
मानवता का उजियारा फैले,
करुणा हर मन का श्रृंगार बने।
विश्व बने एक परिवार हमारा,
ऐसा सुंदर संसार कर दे।
हे ईश्वर! बस इतनी-भर ज़िंदगी दे।
 
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53 मिनट पहले

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