ये जो बैठे हो, उसकी सोहबत में ,
उसकी आंखें और उसका चेहरा ही देखते हो ,
कब तलक देखोगे उसकी नजर में अपने हाल को ,
क्या सफर को उम्र भर उसके संग देखते हो ?
मिलते हो महफिल में फिर अकेले में उसके साये से गले लगते हो ,
यह तरकीब खुद पर आजमा कर अपनों के साथ अच्छा नहीं करते हो ,
खैर जो भी करते हो ठीक है, करते हो ,
आने वालों के रहनुमा हो, क्या उनके ख्याल भी करते हो ?
किस तरह बात करते हो, लगता है अभी भी बीसवीं सदी में रहते हो ,
कुछ तो हाल-ए-दिल बयान करो क्यूं चुपचाप सहते रहते हो,
अभी दिल जवां है और जवां तारीख भी बहुत हैं,
वो शख्स भी तुझे पढ़ना चाहता है क्यूं अपनी किताब बंद रखते हो ।
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