जहां खुश-अतवारी जिंदा है वहां फिर अय्यारी नहीं आती,
मुसिबत ये है, की बाज़ार मे सादगी नज़र नहीं आती,
हम ऐसा चाहत रखते है कि एक दूजे के गले लगे,
वो अपने मयार से उतरती नहीं और मुझे भी गुज़ारिश करना नहीं आता।
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