जिसने पहली दफा ज़ुल्फ ए परेशान को चेहरे से हटाया होगा,
उस कमबख़्त के सूरत पर न सही सीरत पर तो इतराया होगा,
उस घटा का क्या जिसकी तुम गारो-खासी-जयंतिया थीं
जो एक बार तेरे चंगुल में आकर कहीं और न बरस पाया होगा ।
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