नया सवेरा, नई किरण है,
मन में छोटा सा स्पंदन है।
पंख पसारे उम्मीदों के,
छूना नीला सा अंबर है।
राहों में कांटे आएँगे,
मुश्किल के बादल छाएँगे।
पर हौसले अगर अडिग रहे,
तूफ़ाँ भी शीश नवाएँगे।
धीमे हों चाहे कदम तेरे,
रुकना तेरा स्वभाव नहीं।
गिरकर फिर से उठ जाने का,
होता कोई अभाव नहीं।
आज ज़मीं पर खड़े हैं जो,
कल अंबर में लहराएँगे।
मेहनत के पक्के धागों से,
किस्मत नई सजाएँगे।
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