यूँ ठहर जाए नज़र ही
हर अदा उस की पहर है
ज़िंदगी में और क्या है
सिर्फ़ उस का ही असर है
जान मेरी शान मेरी
एक वो पहचान मेरी
दिल उसी का जिस्म भी है
ज़िंदगी अरमान मेरी
चेहरा उस का यूँ खिला है
चाँद जैसे आ मिला है
इस जमी से है गगन को
बूँद पानी का मिला है
साथ होती तो ख़ुशी है
रौशनी ही रौशनी है
आज मेरी ज़िंदगी में
एक उस की ही कमी है
-विनोद गणेशपुरे
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