तेरे आंसू का कतरा-कतरा यू जया मत होने दे,
जो तूने तमाम उम्र सहा है, उसे यू सरे-आम बयां मत कर...
बात छिड़ी है तो हुंकार भी ज़रूर होगी,
अपनी सदाकत को तू यूंही बेकार मत कर...
बेसक जिंदगी गुज़री है तेरी तन्हा रातों में, तू उन चंद रातों की तन्हाईयो में खुद को बदनाम मत कर...
उम्मीदों का सवेरा भी होगा तेरे लिए,
तू बस सब्र को यूं ही बरकरार रख
तेरी जीत का परचम लहरायेगा एक दिन, तू यूं खुद को दरकिनार मत कर।...
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