आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मां का समर्पण

                
                                                         
                            एक माँ ही है, जो चेहरे पर ज़रा-सी शिकन आने पर भी अपने बच्चे के चेहरे का सारा हाल जान लेती है।
                                                                 
                            
माँ के बिना इस सृष्टि की कल्पना कर पाना भी कितना मुश्किल हो जाता है। माँ हमारे हर सुख-दुःख में हमारा हाथ थामे, हमारे साथ खड़ी रहती है।
माँ, जो अपने बच्चों को भूखा देखकर अपना पहला निवाला भी अपने बच्चों को खिला देती है और खुद भूखी सो जाती है।
वह माँ ही है, जो हमें हर वक्त हमें पापा की डाँट से बचाती है। माँ की हर एक दुआ काम आती है, जब वह दुआ उनके दिल से अपने बच्चे के लिए हो।
माँ, जिसका नाम पुकारते ही बच्चे के चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान आ जाती है।
मां जो अपने बच्चों के ख्वाब पूरा करते-करते खुद को ही भुला देती हैं मां जो हमारी प्रेणना है जिसे दुनिया में ईश्वर से बढ़ कर दर्जा दिया गया है

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर