हर लफ़्ज़ पर नाम तेरा है,
ख़्वाहिशें बहुत हैं पर उन ख़्वाहिशों में मुकम्मल सा कुछ भी नहीं।
इंतज़ार तेरा है
पर आहट तेरी नहीं, बेशक़ प्यार भी है उसे मुझसे पर ऐतबार उसे मुझ पर नहीं।
बहुत ख़ामोश रहने लगा है आजकल वो, पर क़सूरवार वो नहीं..
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