इज़हार-ए-मोहब्बत का कोई तो तलबगार होगा, हो जाएँ उसकी सारी ख़्वाहिशें पूरी, ऐसा कोई मददगार होगा।
है तलब उसे भी कि कहीं उसकी जुस्तजू, एक दिन मुकम्मल हो जाएगी।
राह में आती सारी कठिनाइयाँ, फ़ासलों से परे हो जाएँगी।
रख हौसला, मुन्तज़िर को मंज़िल की तलाश है, ख़ुदा ने चाहा तो उसकी वह मुराद भी, एक दिन ज़रूर कुबूल हो जाएगी।
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