आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरी बगिया मेरी साथी

                
                                                         
                            सुंदर सी है मेरी बगिया,
                                                                 
                            
आँखों को देती ठंडक सी,
रोम-रोम में जादू जगाए,
मन को देती राहत सी।

रंग-बिरंगे फूल मुझे,
अपनी ओर बुलाते हैं,
हवा से हिलती बेलें इनकी,
मन को गुदगुदाते हैं।

मेरी बगिया के फूलों के,
रंग इतने सारे हैं,
यूँ कहूँ तो मेघधनुष
के रंगों से भी निराले हैं।

इनके रंग हमेशा मुझे,
अपनी ओर रिझाते हैं,
निराशा से भरे मेरे मन को,
आशा के रंगों से भर जाते हैं।

छोटी सी कली, उम्मीद की,
हर रोज़ किरण जगाती है,
देर हो रही खिलने में पर,
खिले हुए फूलों संग,
वो भी खुलकर इठलाती है।

थक कर जब मैं खाली बैठूँ,
बातें इनसे करती हूँ,
मेरी प्यारी सी बगिया पर,
मैं अपनी जान छिड़कती हूँ।
-विनीता कर्मशील
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर