मैंने लिख दिया है सब कुछ।
अब कुछ बचा नहीं।
मेरी क़िस्मत कहती है मुझसे की।
मेरी जिंदगी में अब कुछ कच्चा नहीं।
पके आम की तरह हो गया हूँ मैं।
कोई तोड़ भी ले, और खा भी ले।
मैंने छोड़ी है वो जंग ये सोच कर।
की कहीं आ रहा होगा मुझसे भी बढ़िया कोई।
मुझे तो पता ही नहीं लड़ना किसे कहते हैं।
जिंदा जला कर राख कर दिया मेरा भी ईमान कोई।
मैं फिर भी हार मानने वाला नहीं।
क्यूंकि मोहब्बत ही कि है मैंने मरते वक्त भी।
मुझसे पीछा छुड़ा लिया है उसने।
नफ़रत के ही लायक था कोई।
अच्छे लोग पसंद नहीं आते उन्हें।
जो शिकायत करते हैं बदसलूकी की।
उन्हें रास ना आई अच्छाई भी।
जो करते रहे अच्छाई की तरफदारी।
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