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नारी शक्ति

                
                                                         
                            रक्तरंजित हाथ में तलवार अब उठाऊँगी
                                                                 
                            
घूरने वाली नज़रो के, सर अलग कर लाऊँगी

मैं मौन नहीं, हाँ साधा मैंने मौन नहीं अब
हर गलत इरादों पर आवाज़ अब लगाऊँगी

रक्तरंजित हाथ में तलवार अब उठाऊँगी

हाँ स्त्री हूँ, लेकिन लाचार नहीं
मुझी से बना तेरा अस्तित्व
मेरा बिना तो खुद सँसार नहीं
ये बात तुम्हें समझाऊँगी

रक्तरंजित हाथ में तलवार अब उठाऊँगी

गलियारों में खड़े हुये
वो नज़रे जमाये रहते हैं
खींचते है चीर मेरा
उन्हें चीर कर दिखाऊँगी

रक्तरंजित हाथ में तलवार अब उठाऊँगी
रक्तरंजित हाथ में तलवार अब उठाऊँगी

नाम- प्रीति बढ़परवाल


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5 वर्ष पहले

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