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तुम्हारे प्यार की ज़रूरत है. .

                
                                                         
                            बचा लेना मुझे ज़माने की तमाम दुश्वारियों से,
                                                                 
                            
मुझे आज भी तुम्हारे प्यार की ज़रूरत है।

जब थक जाएँ मेरी उम्मीदों के सारे रास्ते,
तब तुम्हारे एक ऐतबार की ज़रूरत है।

भीड़ में रहकर भी अक्सर तन्हा हो जाता हूँ,
मुझे तुम्हारे साथ के संसार की ज़रूरत है।

दुनिया हर रोज़ नए इम्तिहान लेती है,
मुझे तुम्हारे हौसलों की दीवार की ज़रूरत है।

मेरे हिस्से की धूप बहुत तेज़ है जानाँ,
मुझे तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की छाँव की ज़रूरत है।

ज़ख्म तो वक़्त के साथ भर ही जाएँगे,
मगर तुम्हारे मरहम ऐ प्यार की ज़रूरत है।

जब भी टूटने लगूँ हालात की ठोकरों से,
मुझे तुम्हारी बाँहों के हार की ज़रूरत है।

न दौलत की चाह है, न शोहरत का जुनून,
बस तुम्हारे नाम के एक अधिकार की ज़रूरत है।

अगर कभी मेरी साँसें भी मेरा साथ छोड़ दें,
उस पल भी तुम्हारी एक पुकार की ज़रूरत है।

बचा लेना मुझे ज़माने की तमाम दुश्वारियों से,
क्योंकि मुझे आज भी... सिर्फ़ तुम्हारे प्यार की ज़रूरत है।
- विकास त्रिपाठी 'विक्की'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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