शंकर जी की भक्ति से इस जग में नवशक्ति का संचार हुआ,
जिसने पूजा भोलेनाथ को, उसका हर बेड़ा पार हुआ।
भस्म रमाए, गले में नाग, मस्तक पर चंद्र उजियार हुआ,
त्रिनेत्र खुले जब भोले के, अधर्म का तब संहार हुआ।
जिसने "ॐ नमः शिवाय" जपकर, अपना जीवन सँवार लिया,
शिव-कृपा की अमृतधारा ने, उसका हर दुःख हर लिया।
बेलपत्र और जल की धारा, जिनको सबसे प्यारी है,
भोले बाबा की महिमा तो, वेदों से भी न्यारी है।
सच्चे मन से जो झुक जाए, उसके भाग्य सँवर जाते हैं,
महाकाल की कृपा बरसे तो, पत्थर भी शिव बन जाते हैं।
कैलाशपति की शरण जो आया, उसका हर उद्धार हुआ,
शंकर जी की भक्ति से इस जग में नवशक्ति का संचार हुआ,
जिसने पूजा भोलेनाथ को, उसका हर बेड़ा पार हुआ।
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