भोले की शक्ति को जिसने महसूस किया है,
सच्ची भक्ति को उसने महसूस किया है।
जिसने श्रद्धा से शिव का नाम पुकारा है,
हर कठिन डगर पर उनका ही सहारा है।
जिनके मस्तक पर चंद्रमा की शीतल छाया है,
उनकी कृपा से हर संकट दूर हो जाया है।
जटाओं से बहती गंगा का पावन संदेश यही,
निर्मल रखो मन अपना, सबसे बड़ी तपस्या यही।
डमरू की हर गूँज जगाती नव चेतना का स्वर,
महाकाल का स्मरण मिटा देता जीवन का हर डर।
नीलकंठ ने विष पीकर जग का कल्याण किया,
त्याग और करुणा का अनुपम सम्मान किया।
जो दुःखियों के आँसू अपने हृदय में उतार ले,
वही शिव की भक्ति का सच्चा अधिकार ले।
बेलपत्र, धतूरा, जल और श्रद्धा का अर्पण हो,
हर भक्त के जीवन में शिव-कृपा का स्पंदन हो।
सावन की हर बूँद महादेव का आशीष बन जाए,
हर सूनी राह पर आशा का दीप जल जाए।
न माँगूँ वैभव, न सोने-चाँदी का संसार,
बस बना रहे भोलेनाथ का स्नेह अपार।
हर श्वास में "ॐ नमः शिवाय" का वास रहे,
जीवन का हर पल शिवमय, हर हृदय उजास रहे।
आइए, सावन के प्रथम सोमवार पर हम सब संकल्प लें—
मन में श्रद्धा, वाणी में मधुरता और कर्म में पवित्रता लाएँ।
भगवान भोलेनाथ आप सभी पर अपनी असीम कृपा बरसाएँ,
आपके जीवन को सुख, शांति, आरोग्य, समृद्धि और सद्भाव से भर दें।
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