अगर मोहब्बत की आहट कभी सुननी हो तुम्हें,
तो अपने ये मख़मली हाथ मेरे दिल पर रख देना।
यक़ीन मानो, कि सीने में धड़कती हर एक धड़कन पर,
फ़क़त तुम्हारा, और सिर्फ़ तुम्हारा ही नाम होगा।
तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की छाँव जब भी ढलेगी मुझ पर,
मेरी हर शाम का बस यही एक हसीं मक़ाम होगा।
ख़ामोश लब भी सुनाएँगे दास्ताँ-ए-इश्क़ हमारी,
जब मेरी उँगलियों में तेरी उँगलियों का क़याम होगा।
तेरी आँखों की झील में जब उतरेंगे ख़्वाब मेरे,
फ़िज़ाओं में हर तरफ़ वफ़ा का ही पैग़ाम होगा।
तेरी साँसों की ख़ुशबू से जब महकेगी मेरी दुनिया,
मेरी हर एक रूह पर सिर्फ़ तेरा ही इख़्तियार होगा।
'जानाँ', आख़िरी साँस तक यह इश्क़ यूँ ही महकेगा,
मेरी हर धड़कन, हर एक लम्हे में तेरा ही नाम होगा।
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