कुछ इस क़दर तेरी मोहब्बत का नशा रहता है मुझ पर,
तेरे सिवा मुझे कुछ याद कहाँ रहता है इधर।
तेरा नाम लबों पर आए, ये ज़रूरी तो नहीं,
मगर दिल का हर धड़कता राज़ तेरा ही रहता है इधर।
कभी तेरी हँसी याद आती है, कभी तेरी ख़ामोशी,
बस इन्हीं दो बातों में दिन गुज़रता है इधर।
लोग पूछते हैं, आखिर किस सोच में डूबे रहते हो,
कैसे कहूँ, कोई मेरी रूह में बसा रहता है इधर।
न मिलने का ग़म भी अब शिकायत नहीं करता,
तेरी यादों का दिया हर रात जला रहता है इधर।
तू सामने हो तो अल्फ़ाज़ बिखर जाते हैं,
तेरे बाद भी तेरा असर बरक़रार रहता है इधर।
मैंने दुनिया से हँसकर रिश्ता निभाया है मगर,
दिल का एक कोना सिर्फ़ तेरे लिए बचा रहता है इधर।
अगर इश्क़ का कोई रंग होता तो वही होता,
जो तेरे ज़िक्र से मेरी आँखों में उतरता है इधर।
कुछ इस क़दर तेरी मोहब्बत का नशा रहता है मुझ पर,
तेरे सिवा मुझे कुछ याद कहाँ रहता है इधर।
— विकास त्रिपाठी 'विक्की'
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