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किताबों में कैद मोहब्बत

                
                                                         
                            हर किसी के मुक़द्दर में मुकम्मल मोहब्बत नहीं होती,
                                                                 
                            
कुछ प्रेम कहानियाँ बस किताबों की ज़ीनत बनकर रह जाती हैं।
किसी की आँखों में ख़्वाब अधूरे ठहर जाते हैं,
तो किसी के होंठों पर अल्फ़ाज़ बिखर जाते हैं।
कुछ रिश्ते वक़्त की धूल में दब जाते हैं,
कुछ लोग अपनों के बीच भी पराए हो जाते हैं।
मोहब्बत हर बार बेवफ़ाई नहीं हारती,
कभी-कभी मजबूरियाँ भी जीत जाती हैं।
जो हाथ उम्रभर थामने का वादा करते हैं,
वही हाथ एक मोड़ पर छूट जाते हैं।
दिल चाहता है कि कहानी मुकम्मल लिखी जाए,
मगर तक़दीर आख़िरी सफ़ा बदल देती है।
कुछ ख़त बिना पढ़े ही राख हो जाते हैं,
कुछ आँसू बिना गिरे ही सूख जाते हैं।
जो मिल नहीं सके, वही सबसे ज़्यादा याद आते हैं,
जो बिछड़ गए, वही उम्रभर साथ निभाते हैं।
इश्क़ का अंजाम हमेशा मिलन नहीं होता,
कभी जुदाई भी मोहब्बत की सबसे बड़ी निशानी होती है।
इसलिए हर प्रेम कहानी का अंत ख़ुशियों में नहीं होता,
कुछ प्रेम कहानियाँ बस किताबों की ज़ीनत बनकर रह जाती हैं।
-विकास त्रिपाठी 'विक्की'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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