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किस्तें मोहब्बत की .....

                
                                                         
                            कुछ किस्तें आज भी तुम्हारी मोहब्बत की मुझ पर बाकी हैं,
                                                                 
                            
तुम जब इजाज़त दो, मुस्कुराकर उन्हें लौटा दूँ।
जो अमानत थी तेरी, दिल ने सँभाल रखी अब तक,
तू अगर इजाज़त दे, हँसकर उसे लौटा दूँ।
जो तेरी याद ने हर ज़ख़्म को जीना सिखाया,
तू अगर कह दे, वो हर हौसला लौटा दूँ।
तेरी चाहत का नशा आज भी साँसों में बसा है,
तू अगर चाहे, मैं हर सिलसिला लौटा दूँ।
जो दुआ बन के तेरे नाम लबों पर ठहर गई थी,
तू अगर रूठे, वो हर इल्तिजा लौटा दूँ।
मैंने हर दर्द को ख़ामोश वफ़ाओं से निभाया,
तू अगर कह दे, मैं हर गिला लौटा दूँ।
मेरी पलकों पे जो अरमान सजे रात-दिन तेरे,
तू अगर चाहे, वो हर सपना लौटा दूँ।
'विक्की' इश्क़ में माँगा भी तो बस नाम था तेरा,
अब जो अपना नहीं, तुझको वही लौटा दूँ।
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2 महीने पहले

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