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जब याद मेरी आए

                
                                                         
                            कभी फ़ुर्सत मिले तो मेरी ख़ामोशियाँ भी पढ़ लेना,
                                                                 
                            
हर लफ़्ज़ में तुम्हारा ही नाम मिलेगा।

मैंने मोहब्बत को कभी बाज़ार नहीं बनने दिया,
इसलिए मेरा इश्क़ बदनाम नहीं मिलेगा।

तुम्हें पाने की ज़िद भी थी, खोने का सब्र भी,
मेरे जैसा कोई तुम्हें सरेआम नहीं मिलेगा।

लोग कहते हैं वक़्त हर ज़ख़्म भर देता है,
मगर कुछ दर्दों का कोई अंजाम नहीं मिलेगा।

मैंने तुम्हारी यादों को सजदे की तरह रखा है,
इनका कोई और मुकाम नहीं मिलेगा।

अगर कभी आँखों में यूँ ही नमी उतर आए,
समझ लेना मेरा नाम हवाओं ने लिया है।

और अगर कभी भीड़ में अचानक मुस्कुरा दो,
समझ लेना मेरा ख़याल तुम्हें छू गया है।

मोहब्बत का हिसाब नहीं रखा मैंने कभी,
वरना हर साँस पर तुम्हारा ही नाम लिखा मिलता।

अगर सच में कोई आख़िरी मोहब्बत होती है,
तो यक़ीन मानो... मैंने वही तुमसे की थी।
— विकास त्रिपाठी 'विक्की'
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3 महीने पहले

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