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इत्मीनान से समझना मेरी मोहब्बत को

                
                                                         
                            इत्मीनान से समझना मेरी मोहब्बत को,
                                                                 
                            
आज अपनी हसीन आँखों में मुझे खो जाने दो।
लबों पर जो ठहरे हैं अनकहे अफ़साने,
उन्हें आज ख़ामोशियों में ही कह जाने दो।
तेरी नज़रों की बारिश में भीगने का मन है,
इस दिल को कुछ पल यूँ ही महक जाने दो।
ये धड़कनें तेरे नाम का वज़ीफ़ा पढ़ती हैं,
इनकी सदा को तेरे दिल तक पहुँच जाने दो।
मुझे न चाहो तो कोई शिकवा भी नहीं,
बस एक बार अपनी पलकों पर ठहर जाने दो।
तेरे चेहरे की रौशनी मेरी सुबह बन जाए,
इस रात को तेरी बाँहों में ढल जाने दो।
मोहब्बत का हिसाब लफ़्ज़ों से नहीं होता,
आज एहसास को एहसास से मिल जाने दो।
अगर मुकद्दर में साथ लिखा है हमारा,
तो फ़ासलों को भी आज मिट जाने दो।
और अगर बिछड़ना ही अंजाम है इस इश्क़ का,
तो आख़िरी बार मुझे जी भरकर मुस्कुराने दो।
इत्मीनान से समझना मेरी मोहब्बत को,
आज अपनी हसीन आँखों में मुझे खो जाने दो।
— विकास त्रिपाठी "विक्की"
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3 महीने पहले

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