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इंतज़ार तुम्हारी कॉल का

                
                                                         
                            बहुत दिनों तक तुम्हें याद किया,
                                                                 
                            
पर तुम्हारा कॉल नहीं आया।

दिल ने लाखों बार तुम्हें पुकारा,
मगर तुम्हारा ख़याल नहीं आया।

हर आहट पर लगा तुम ही हो,
पर तुम्हारा पैग़ाम नहीं आया।

मोबाइल हाथों में थामे बैठे रहे,
फिर भी तुम्हारा नाम नहीं आया।

रात भर जागकर चाँद से पूछा,
क्यों उसका सलाम नहीं आया।

आँखों ने हर सपना सँजोकर रखा,
मगर उसका अंजाम नहीं आया।

शायद तुम अपनी दुनिया में खुश हो,
हमारे हिस्से कोई इल्ज़ाम नहीं आया।

हमने मोहब्बत दिल से निभाई,
तुम्हारी तरफ़ वही मुकाम नहीं आया।

अब शिकायत भी नहीं करते तुमसे,
क्योंकि प्यार कभी बदनाम नहीं आया।

बस आज भी एक ही कमी खलती है,
इतना याद किया... फिर भी तुम्हारा कॉल नहीं आया।

 
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3 महीने पहले

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