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इल्ज़ाम

                
                                                         
                            इकरार का इल्ज़ाम मुझ पर डाला,
                                                                 
                            
इज़हार का इल्ज़ाम मुझ पर डाला।

मेरी जान, तुम भी कमाल निकली,
इंकार का इल्ज़ाम भी मुझ पर डाला।

ख़ुद तोड़ गए रिश्ते की हर एक डोरी,
टूटने का इल्ज़ाम मुझ पर डाला।

ख़ुद मोड़ लिया रुख़ ज़माने की जानिब,
बदलने का इल्ज़ाम मुझ पर डाला।

मेरे नाम की महफ़िल भी तुमने सजाई,
बदनाम का इल्ज़ाम मुझ पर डाला।

मैं चुप था, मगर दिल गवाही दे रहा था,
ख़ामोशी का इल्ज़ाम मुझ पर डाला।

मोहब्बत में दोनों बराबर थे फिर भी,
हर हार का इल्ज़ाम मुझ पर डाला।

— विकास त्रिपाठी 'विक्की'
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3 महीने पहले

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