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गवाही अश्कों की

                
                                                         
                            कहना ये था कि बिन तेरे भी जी लेंगे हम तन्हा,
                                                                 
                            
पर ग़ुस्ताख़ अश्कों ने आँखों में भरकर गवाही दी।

हमने कहा था दिल से—अब उसका ज़िक्र भी न होगा,
धड़कनों ने मगर हर धड़कन में उसकी गवाही दी।

महफ़िल में मुस्कुराकर छुपा लिया दर्द अपना,
तन्हाई ने मगर रात भर मेरी हालत की गवाही दी।

हमने तो कह दिया था—मोहब्बत अब नहीं रही,
आईने ने मेरी आँखों में उसकी तस्वीर की गवाही दी।

जिसे भूलने की क़सम खाई थी हमने उम्र भर,
हर साँस ने मगर उसके होने की गवाही दी।

लब ख़ामोश रहे, हम दुनिया से बेख़बर बने रहे,
मगर इन ग़ुस्ताख़ अश्कों ने सारी मोहब्बत की गवाही दी।

✍️ विकास त्रिपाठी 'विक्की'
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2 महीने पहले

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