ज़माने ने मुझे धोखे दिए कई बार,
पर तक़दीर ने मुझे कभी झुकने न दिया।
जब गिरा, सँभल गया मैं,
मेरे प्यार ने मुझे कभी धोखा न दिया।
हर मोड़ पर इम्तिहानों का मेला था,
मगर हौसलों ने मेरा हाथ न छोड़ा।
अपनों की ख़ामोशियाँ भी बहुत चुभीं,
फिर भी मैंने किसी से शिकवा न किया।
वक़्त ने हर रोज़ नया सबक़ सिखाया,
मैंने हर दर्द को मुस्कुराकर जिया।
तूफ़ानों ने लाख कोशिशें कीं,
मेरे इरादों का दीप मगर बुझा न सके।
राहें कठिन थीं, मंज़िल दूर सही,
कदमों ने मगर सफ़र रोकना न सीखा।
मैंने मोहब्बत को इबादत समझा,
उसने मेरे विश्वास को कभी बिखरने ना दिया।
आज जो मुस्कुरा रहा हूँ,
ये यूँ ही नहीं, दर्द की कमाई है।
ज़माने ने मुझे हर बार आज़माया,
मगर मेरे यक़ीन को मिटा न सका।
ज़माने ने मुझे धोखे दिए कई बार,
पर तक़दीर ने मुझे कभी झुकने न दिया।
— विकास त्रिपाठी "विक्की"
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