रंगीन शाम है, नर्मी है बाहों के हार में,
लगता है चाँद भी, शामिल है इस प्यार में।
महक रही हैं वादियाँ, फूल हैं बहार में,
जैसे कोई दुआ, उतर आई हो संसार में।
अधरों की अठखेलियां ,ना कमी थी श्रृंगार में
दिल की धड़कन खो गई ,उनके एक इकरार में
कोमल तन का छुवन , प्रेम के अधिकार में,
शर्मीले झुके नैन देख , मन खो गया दीदार में।
"नज़रों के आलिंगन से, नैया पड़ी मझधार में
फूल भी शर्मा गए , उनकी मुस्कान की फुहार में
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