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मैने तुमको देखा

                
                                                         
                            मैने तुमको देखा
                                                                 
                            
मरघट पर

किंतु कदाचित
तुम न थे
अश्रु में
विलाप में
शोक और
संताप में
सांत्वना में
न प्रार्थना में
न निर्दिष्ट धर्म ,
न अंत्येष्टि कर्म में

किंतु मैने तुमको देखा
निश्चित ही
तुम थे
काष्ठ में
रिक्त में
अग्नि अनिल
जल पवित्र में
हवि में
स्नेह में
मंत्र और
भौतिक देह में
तुम थे
चिता के ताप में
और अंततः
पश्चाताप में

तुम सदा ही थे
मुझ -जीव साक्षी
के प्रश्न में
'मै कौन हूं ? '
मैने सर्वत्र ही
तुमको देखा
मैने सत्य को
तुममें देखा
और
तुमको देखा सत्य में
- विकास मोहन गुप्ता
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एक घंटा पहले

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