चंदा मामा तुम सुनते हो।
या खाली मन में गुनते हो।
माँ लेकर आयी हैं राखी।
तेरा आना बस है बाक़ी।
दूर हमेशा ही रहते हो।
मुँह से भी ना कुछ कहते हो।
सबके मामा हैं घर आते।
तोड़ लिए क्या रिश्ते नाते।
माँ ने सब पकवान बनाये।
आओ मामा हम मिल खाएं।
देखो झूम रहा है सावन।
राखी का त्यौहार है पावन।
-विकास कालाआमी
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