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उड़ान

                
                                                         
                            वह बाधा नहीं आधी दुनियाँ है
                                                                 
                            
बिना उनके मानव जाति अधूरा है
इस चल अमृत भुवन में
उड़ने दो उन्हें ,उनके सपनों की उड़ानों में
खिलने दो उन्हें ,उनकी फूलों की बहारों में
इस चल अमृत भुवन में
वह घर की लक्ष्मी हैं, दुर्गा हैं, सरस्वती है
वह श्रद्धा है, विश्वास है, सम्मान है
इस चल अमृत भुवन में
एक घर की मान बढ़ाती ,दूसरे में संसार सजाती
पलकों पर सबको बैठाती
इस चल अमृत भुवन में
निःशब्द नहीं वह ,विचारों की अलौकिक जननी है
संस्कारित, और घर की एक दुलारी रमणि है
इस चल अमृत भुवन में
पुनः स्मरणार्थ, वह इस धरा की संजीवनी है
मेरे आंगन में भी बिटिया 'आशिता' और ' पल्लवी' है
इस चल अमृत भुवन में
-विजयेंद्र कुमार
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2 वर्ष पहले

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